Friday, January 28, 2011

ना जाने क्यूँ

ना जाने क्यूँ मरने के बाद भी ,
आज जीने  का ख़्वाब आ गया ,,
ना जाने आज क्यूँ इस लाश के अन्दर ,
साँसों का एहसास आ गया ,,
ना जाने क्यूँ अब इस तन्हाईयों में,
ज़िन्दगी जीने का एहसास आ गया ,,
ना जाने क्यूँ आज इस छाँव में भी ,
आँखों के आगे तस्वीर के रूप में
      सूरज आ गया ,,
ना जाने क्यूँ जख्मों  इस सूखेपन को भरने,
प्यार का सागर ना  जाने कहाँ से आ गया ,,
ना जाने क्यूँ इस मन में आज ,
दीवानगी का ख़्वाब आ गया ,,
और ना जाने क्यूँ इस बार

इस दिल में पहली बार ,
नफरत की आग को भुजा कर,,
प्यार के फूल  को  एहसास आ गया ,,,,,,

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